उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की नौ विधानसभा सीटों को किसान सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार के कृषि कानून को वापस लेने के फैसले से काफी कुछ बदल सकता है।

उत्तराखंड में भी कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर मतदाता के रूप में किसान बड़ा उलटफेर कर सकते हैं। हरिद्वार जिले की बात करें तो यहां की नौ विधानसभा सीटों को किसान सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार के कृषि कानून को वापस लेने के फैसले से काफी कुछ बदल सकता है।

हरिद्वार जिले में 94 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। यहां एक लाख 28 हजार किसान खेती करते हैं। जिले में मुख्य रूप से गन्ना, गेहूं, धान सब्जियां और बागवानी की खेती होती है। 16 हजार खेतिहर मजदूर भी हैं, जो कि किसानों से जुड़े हुए हैं। विधानसभा के हिसाब से देखा जाए तो मंगलौर, झबरेड़ा, भगवानपुर, कलियर, ज्वालापुर, खानपुर, लक्सर, रानीपुर और हरिद्वार ग्रामीण में किसान वोट बैंक ठीकठाक संख्या में है।

इन विधानसभा क्षेत्रों में ही कृषि कानूनों को लेकर सबसे अधिक धरना-प्रदर्शन देखने को मिला है। मंगलौर और कलियर विधानसभा से जुड़े किसान तो दिल्ली के आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के तमाम बड़े पदाधिकारी भी इस बात को लेकर चिंतित नजर आ रहे थे। वहीं, पिछले सप्ताह ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र के मानुबास णें आयोजित किसान मेले के दौरान भी किसान मुख्यमंत्री से भी मांग कर रहे थे कि तीनों कृषि कानून को वापस लिया जाए। ऐसे में तीनों कृषि कानून वापस होने से भारतीय जनता पार्टी भी राहत महसूस कर रही है।

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