22 फरवरी 2022 रिपोर्ट मनीष सपरा परिवर्तन का शंखनाद

बदलापुर के अनाथालय में पली-बढ़ी शबाना शेख (Shabana Sheikh) ने नीट (NEET 2021) की परीक्षा पास कर सभी को गौरवान्वित किया है. अनाथालय के एक स्टाफ का कहना है, ‘शबाना ने दूसरों के लिए एक मिसाल कायम की है. अक्सर ऐसी परिस्थिति में लोग उम्मीद खो देते हैं. उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है और भटक जाते हैं. अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की बजाय नियति को दोष देते हैं. शबाना, प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी हैं.

 शबाना शेख (Shabana Sheikh) ने साबित कर दिया है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर इंसान के अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो वह अपने मुकाम को हासिल कर ही लेता है. मुंबई से सटे बदलापुर के एक अनाथालय में पली-पढ़ी 22 साल की शबाना शेख ने हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (National Eligibility Cum Entrance Test- NEET 2021) पास करने के बाद अपने सपने को साकार करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है. उन्हें एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला है.

अस्पताल में मिली थीं बेसहारा
करीब 18 साल पहले, जब शबाना सिर्फ 4 साल की थी, तो वह अपने 1 साल के भाई के साथ मुंबई के अस्पताल में मिली थीं. उसके माता-पिता की बहुत तलाश की गई, मगर उनका पता नहीं चला. आखिरकार शबाना और उसके भाई को बदलापुर के एक अनाथालय में भेज दिया गया. शुरुआत में वो हमेशा गुमशुम और अकेली रहती थीं. किसी से बात नहीं करती थीं. कुछ दिनों के बाद अनाथालय के कर्मचारियों ने देखा की शबाना पढ़ाई-लिखाई में बेहद होशियार है. मगर उन लोगों ने यह कभी नहीं सोचा था कि एक दिन शबाना उनकी संस्था का नाम इतना रोशन करेगी

हर किसी को है गर्व
बॉम्बे टीन चैलेंज अनाथालय (Bombay Teen Challenge) की सुपरिटेंडेंट पद्मा गुधे (Padma Gudhe) कहती हैं, ‘शबाना हमेशा पढ़ाई में अव्वल रही है. वो हमेशा कहती थी कि वो डॉक्टर बनना चाहती है, लिहाजा हमने उसे अपने पसंद के क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया. हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि एक दिन वह हम सभी को इस तरह हैरान कर देगी.’

दिन-रात की मेहनत
गाना गाने की शौकीन शबाना ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में कहा, ‘मुझे हमेशा अनाथालय के ट्रस्टियों ने प्रोत्साहित किया. उन्होंने मुझे कभी भी परीक्षा के लिए अध्ययन सामग्री की कमी नहीं होने दी. साल 2019 में भी मैंने नीट (NEET) के लिए कोशिश की थी, मगर मैं अपने स्कोर से संतुष्ट नहीं थी. लिहाजा, 2 साल और तैयारी करके मैंने फिर से परीक्षा दिया और मुझे औरंगाबाद मेडिकल कॉलेज में सीट मिली.’

समाज की करेंगी सेवा
शबाना कहती हैं, ‘ मुझे अपनी फैमिली के बारे में कुछ भी याद नहीं, जिन्होंने मुझे ऐसे मेरे भाई के साथ छोड़ दिया. मैंने पीछे मुड़कर देखने की जगह आगे बढ़ने का फैसला किया. मैं अपने और अनाथालय के बेहतर भविष्य के लिए काम करना चाहती हूं. यही अब मेरा परिवार है, जिसने मुझे अपना माना और आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया. यहां मेरे दोस्तों को मुझ पर गर्व है. उन्होंने हमेशा मेरे दैनिक कामों मे मेरी मदद की है ताकि मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकूं. यही वजह रही कि मैं रोजाना 8-9 घंटे पढ़ाई कर पाई और मेडिकल की परीक्षा की तैयारी कर सकी.’ शबाना स्त्री रोग में विशेषक्षता हासिल कर समाज की सेवा करना चाहती हैं.

कलेक्टर ने किया सम्मानित
ठाणे के कलेक्टर राजेश नार्वेकर ने शबाना को उनकी इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया है और साथ ही यह भी आश्वासन दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वो शबाना की सहायता के लिए हमेशा तैयार हैं. वहीं अब शबाना अपने सपनों की ओर उड़ान भरने के लिए बेहद उत्साहित हैं. वो कहती हैं, ‘अनाथालय में मिले प्यार और प्रशंसा की वह कमी महसूस करेंगी, लेकिन वह मेडिकल की पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन कर उस कमी को दूर करेगी और सभी को गौरवान्वित करेंगी.’

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